तुम कैसे हो ; मुझ जैसा ख़ुशनसीब,
कोई नहीं जहाँ में,
चाहता यही हूँ दिल में,
कोई दुश्मन न हो जहाँ में,
कहाँ रहते हो ; सारी कायनात मेरा घर है,
सारे परिंदे हैं मित्र मेरे,
सारी मानव जाती हैं भाई बहन,
सभी सखा हैं, सभी मेरे अपने,
तुम्हारे दिल में सबसे
ज्यादा दर्द किसके लिए है; किसी मानव को न्याय न मिले ,
तो दर्द व तड़प होती है,
मानवता की सरहद तक,
उसकी मदद होती है.
तुम किसी की मदद
कैसे करते हो ; खुदा गवाह है हम,
किसी की मदद नहीं करते,
ख़ुदा ख़ुद ही इंसानी रूह में,
बेगुनाह की मदद करते हैं.
तुम्हे उर्दू-हिंदी का
ज्ञान कहाँ से हुआ; न उर्दू ही पड़ी है
न हिंदी का ज्ञान है
यह परीक्षा की घडी है,
खुदा का फ़रमान है.
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