Thursday, October 21, 2010

devta ki paribhasha..



इंसान की इंसानियत को,
जगाने में सुख मिलता है,
          वे हैवान हैं जिनको प्राणी को,
          सताने में सुख मिलता है.
दुश्मन को दोस्त बना लो.
यही प्यार की पराकाष्ठा है
         इसी में आत्मा का सुख है,
         यही ईश्वरीय कल्पना है.
चाहते हो दीदार सुख का,
तो सब एक हो जाओ ,
          भगवन की भक्ति में सब,
          मिलकर तल्लीन हो जाओ,
यही अमृत की वर्षा है
समुद्र मंथन भी यही है,
          वही सब देव हैं जिनमे,
          सहनशीलता बसी है .

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