पौलीथीन ने मेरे देश कू,
ऐसो नरक बनायो है,
वाहि में आटा, वाहि में गंदगी,
वाहि में घी टपकायो है,
थूक दान और पीक दान में
पौलीथीन को इस्तेमाल करें,
छोरे इनकू सड़क पे बीनें,
सेकिंड को माल तैयार करें
इतनी गन्दी पौलिथिन में,
मानव अपना धरम धरें,
विचार करें वो छूत-अछूत कौ,
खान- पान बाही में धरें,
सबरे सीवर चोक भए,
नालन में कहर बरपायो है,
जा पॉलीथिन ने तो भैया,
देश कू नरक बनायो है,
दूध, दही और मक्खन लेऊ,
चाहै लेऊ पशु आहार है,
खाली हाथ चलिंगे ऐसे,
जैसे काऊ पे करज उधार है,
जेब काट रे हैं सब तेरी,
सभी में अत्याचार है,
सड़ी-गली सब चीज धर दी,
पैकिंग जैसे कोई उपहार है,
साग लेऊ चाहे लेऊ किराना,
पहलों एकु सवाल है,
पौलिथिन यदि नहीं है तो पै,
माल तेरो बेकार है,
लै लेऊ प्रण अब अपने मन में,
खाली हाथ नहीं जाएँगे,
एक नहीं अब दो-दो थैला,
संग अपने ले जाएँगे,
सब सामन छांट के लेंगे,
हाथ नहीं लगवाएँगे,
पौलीथीन में जो बेचेगा,
उसका उपहास उडाएँगे,
पौलिथिन को बीन के घर में,
उसको नष्ट कराएंगे ,
बच्चा, बड़े सबंकूं घर में ,
ऐसी सीख सिखाएंगे,
उन आशीष हम धन्य होएँगे,
जो हम पर उपकार करिंगे
बंदी कर के पौलिथिन कू
सबको बेडा पार करिंगे,
नगर-गामवासी सब लेऊ,
पौलिथिन बेकार है,
जाको उपयोग नाहे करिंगे,
या बीमारी को आधारू है,
टोल के टोल बनायके चल्दौ,
हाथ जोड़ के ये गुहार है,
पौलिथिन जापे तुम देखो,
करौ बकौ तिरस्कार है,
ऐसी अलख जगाए देऊ भैया,
जे तो एक उपकार है,
पौलिथिन है भ्रष्ट आचरण,
जा को नाय कोई सार है,
भैया,बहन, मात तुम सुन लेऊ,
पौली-पैक नहीं लाएँगे,
करिंगे विरोध शालीनतापूर्वक ,
धरती को स्वर्ग बनाएँगे,
घर-घर जाकर करो जागरण,
अब जागा विश्वास है,
बहुत लुट लिए, अब ना लुटेंगे,
पौलिथिन अभिशाप है.
Monday, December 13, 2010
Thursday, October 21, 2010
devta ki paribhasha..
इंसान की इंसानियत को,
जगाने में सुख मिलता है,
वे हैवान हैं जिनको प्राणी को,
सताने में सुख मिलता है.
दुश्मन को दोस्त बना लो.
यही प्यार की पराकाष्ठा है
इसी में आत्मा का सुख है,
यही ईश्वरीय कल्पना है.
चाहते हो दीदार सुख का,
तो सब एक हो जाओ ,
भगवन की भक्ति में सब,
मिलकर तल्लीन हो जाओ,
यही अमृत की वर्षा है
समुद्र मंथन भी यही है,
वही सब देव हैं जिनमे,
सहनशीलता बसी है .
Wednesday, October 20, 2010
moksha-marg
वैमनस्य को दूर भगा दो,
जीवन में यह सर्वोपरि है,
लोभ मोह आकंठित प्राणी,
के उबार की संजीवनी है,
तेरे बेटा-बेटी जैसा,
यह सारा संसार है,
कर्म छोड़ जब लोभ में डूबा,
तभी तो अत्याचार है ,
अत्याचारी बनकर जिसने
कर्म किया भरपूर है,
उस प्राणी का इस धरती पर,
जीवन बोझिल- शूल है,
कोई लाभ नहीं जीवन भर,
छीन के रोटी खाने में,
कर्म करो सब मानवता के,
इस संसार घराने में.
(१९/१०/१०,९:१० पूर्वाह्न)
जीवन में यह सर्वोपरि है,
लोभ मोह आकंठित प्राणी,
के उबार की संजीवनी है,
तेरे बेटा-बेटी जैसा,
यह सारा संसार है,
कर्म छोड़ जब लोभ में डूबा,
तभी तो अत्याचार है ,
अत्याचारी बनकर जिसने
कर्म किया भरपूर है,
उस प्राणी का इस धरती पर,
जीवन बोझिल- शूल है,
कोई लाभ नहीं जीवन भर,
छीन के रोटी खाने में,
कर्म करो सब मानवता के,
इस संसार घराने में.
(१९/१०/१०,९:१० पूर्वाह्न)
Friday, October 8, 2010
Thursday, October 7, 2010
"Mera Parichay"
तुम कैसे हो ; मुझ जैसा ख़ुशनसीब,
कोई नहीं जहाँ में,
चाहता यही हूँ दिल में,
कोई दुश्मन न हो जहाँ में,
कहाँ रहते हो ; सारी कायनात मेरा घर है,
सारे परिंदे हैं मित्र मेरे,
सारी मानव जाती हैं भाई बहन,
सभी सखा हैं, सभी मेरे अपने,
तुम्हारे दिल में सबसे
ज्यादा दर्द किसके लिए है; किसी मानव को न्याय न मिले ,
तो दर्द व तड़प होती है,
मानवता की सरहद तक,
उसकी मदद होती है.
तुम किसी की मदद
कैसे करते हो ; खुदा गवाह है हम,
किसी की मदद नहीं करते,
ख़ुदा ख़ुद ही इंसानी रूह में,
बेगुनाह की मदद करते हैं.
तुम्हे उर्दू-हिंदी का
ज्ञान कहाँ से हुआ; न उर्दू ही पड़ी है
न हिंदी का ज्ञान है
यह परीक्षा की घडी है,
खुदा का फ़रमान है.
कोई नहीं जहाँ में,
चाहता यही हूँ दिल में,
कोई दुश्मन न हो जहाँ में,
कहाँ रहते हो ; सारी कायनात मेरा घर है,
सारे परिंदे हैं मित्र मेरे,
सारी मानव जाती हैं भाई बहन,
सभी सखा हैं, सभी मेरे अपने,
तुम्हारे दिल में सबसे
ज्यादा दर्द किसके लिए है; किसी मानव को न्याय न मिले ,
तो दर्द व तड़प होती है,
मानवता की सरहद तक,
उसकी मदद होती है.
तुम किसी की मदद
कैसे करते हो ; खुदा गवाह है हम,
किसी की मदद नहीं करते,
ख़ुदा ख़ुद ही इंसानी रूह में,
बेगुनाह की मदद करते हैं.
तुम्हे उर्दू-हिंदी का
ज्ञान कहाँ से हुआ; न उर्दू ही पड़ी है
न हिंदी का ज्ञान है
यह परीक्षा की घडी है,
खुदा का फ़रमान है.
"saarthi ka sach"
नाम सारथि है मेरा, परिंदों की खबर रखता हूँ,
हर दिल अज़ीज़ हूँ,इंसानियत की फिक्र रखता हूँ.
हर दिल अज़ीज़ हूँ,इंसानियत की फिक्र रखता हूँ.
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