Friday, January 13, 2012

Jeevan-Saathi

जीवन साथी 

जीवन नहीं है साथी, संस्कार की डगर है,
चलना जरा संभल के, परमात्मा का यह घर है,
 
शादी-विवाह का बंधन, संस्कार प्रबल होता,
मनमती  और कलह से, जीवन तिरष्कृत होता,

जिस उचंग व निष्ठां से, शादी रचाई हमने,
मन, वचन व कर्म से, सपने सजाये हमने,

ऐ है वक्त की बलिहारी, कोई न संग होता,
जीवन साथी ही हर डगर, मेरे मन का मीत होता,

समझे जरा ह्रदय में, कोई बैर भाव न होता,
एक-दूजे के दिल में, सारा जहाँ है होता,

मनमती को हटाकर, सोचें जरा ह्रदय में,
निर्वस्त्र है यह जीवन, संग दिल से ढका है तन,

तेरे प्यार की कहानी, है दिल की जवानी  मेरे,
फिर क्या कसूर मेरा, क्यों ह्रदय पीर मेरे,

मैंने कहाँ की है गलती, मैंने कहाँ तीर छोड़ा,
तेरा ह्रदय  भेदा ऐसा, मन का मोती तोडा,

मुझे माफ़ कर दे साथी, जीवन को साथ ले लो, 
मुझे ह्रदय से लगा लो, परिणय की  रात दे दो,

मैंने भूल में भी तेरा, कभी-कहीं दिल है तोड़ा,
मुझे शमा कर दो दिल से, दिल संस्कार का हिंडोला,

एक दूजे को बने हम, फिर ऐसी क्या है जल्दी, 
तेरे तन-बदन चढ़ी है, तेरे तन-बदन की हल्दी,

इस हल्दी की महक को, संस्कार है निभाते,
परिवार है यह तेरा, इसे दिल में है सिहाते,

संकल्प, सत्संग, सदाचार, संस्कार का ही अंग है,
जीवन का साथ निभाओ, यही जीवन का सत्संग,

सत्संग के विरह की, गति-मति न कोई जाने,
इस सत्य के वचन को, जीवन से कम न जानें,

तेरे ज्ञान-विज्ञानं की, यही तो परीशा है, 
जिसने विवेक साधा, यह उसकी कल्पना है,

इस कल्प वर्षस   को, कभी मुरझाने न देना,
जीवन है देने प्रभु की, जीवन भर साथ देना,

जीवन-साथी ही जीवन में, इश्वर का रूप होता, 
राधा व श्याम के रूप में, जीवन का स्वरुप होता,

जीवन नहीं है साथी, संस्कार की डगर है,
चलना जरा संभल के, परमात्मा का यह घर है, 

                                                              दिनेश कुमार वर्मा 'सारथी'





 

1 comment:

  1. In poem-form, your presentation of the role of the spouse in Indian life is not only appreciable but also deserves to be followed up by those who do not attach importance to the wishes and association of their spouse more than a toy to be played with and put away after their lust is over. As designed by GOD, by respectful living together with the spouse (Jeevan Sathi) for the whole life we do not oblige any one but just follow the wish of GOD. A good expression in terms of Indian Culture!

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